डीयू के वीसी बनाएं 5 सदस्यीय कमेटी : टीचर्स एसोसिएशन

नई दिल्ली, 20 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली विश्वविद्यालय के अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के शिक्षक संगठनों ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति (वाइस चांसलर) को पत्र लिखकर मांग की है कि शिक्षकों की स्थायी नियुक्तियों से पूर्व रोस्टर, प्रो. काले कमेटी की रिपोर्ट व विज्ञापनों की सही से जांच कराने के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी बनाई जाएं। कमेटी में वरिष्ठ प्रोफेसर, पूर्व विद्वत परिषद सदस्य के अलावा रोस्टर की जानकारी रखने वालों को इसमें रखा जाए। यह कमेटी अपनी रिपोर्ट 15 दिन के अंदर दे। सही रोस्टर के बाद ही कॉलेजों के विज्ञापन निकाले जाएं। दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने बताया है कि हाल ही में आ रहे स्थायी शिक्षक नियुक्तियों के विज्ञापनों में कई तरह की विसंगतियां हैं। कॉलेजों द्वारा निकाले जा रहे विज्ञापनों में भारत सरकार की आरक्षण नीति व डीओपीटी के निर्देशों को सही से लागू नहीं किया गया है। साथ ही जो पद निकाले जा रहे हैं उनमें शॉर्टफाल, बैकलॉग और विश्वविद्यालय द्वारा बनाई गई प्रो. काले कमेटी की रिपोर्ट को स्वीकारते हुए करेक्ट रोस्टर नहीं बनाया गया है। इसमें एससी,एसटी, ओबीसी अभ्यर्थियों को जिस अनुपात में आरक्षण मिलना चाहिए था, वह नहीं दिया जा रहा है। तमाम कॉलेज सामाजिक न्याय और भारतीय संविधान की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं एसोसिएशन ने बताया कि भगतसिंह कॉलेज (सांध्य) और स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज ने शिक्षकों के पदों के विज्ञापन निकाले हैं। शिक्षकों ने रोस्टर और आरक्षण को लेकर शिकायत की है, जिसमें भगत सिंह कॉलेज का रोस्टर फिर से बनाया जा रहा है। दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन के प्रभारी व पूर्व विद्वत परिषद सदस्य प्रोफेसर हंसराज सुमन कहा, वाइस चांसलर को लिखे गए पत्र में उन्होंने विश्वविद्यालय में सामाजिक न्याय दिलाने की मांग करते हुए आरक्षण, रोस्टर और विज्ञापनों की जांच करने के लिए एक वरिष्ठ प्रोफेसर के नेतृत्व में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया जाए। कमेटी में पूर्व विद्वत परिषद सदस्य, रोस्टर की सही जानकारी रखने वाले सदस्यों को ही रखा जाए। कमेटी कॉलेजों में जाकर यह जांच करे कि हाल ही में शिक्षकों की स्थायी नियुक्तियों के लिए निकाले जा रहे विज्ञापन क्या सही है या नहीं। दिल्ली यूनिवर्सिटी एससी, एसटी, ओबीसी टीचर्स फोरम के अध्यक्ष डॉ. के.पी.सिंह ने बताया है कि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्गो (ईडब्ल्यूएस आरक्षण) को 10 फीसदी आरक्षण फरवरी ,2019 में आया था, जिसे विश्वविद्यालय और कॉलेजों ने स्वीकारते हुए इसको रोस्टर में शामिल कर लिया। कॉलेजों ने ईडब्ल्यूएस रोस्टर को फरवरी 2019 से न बनाकर उसे एससी, एसटी, ओबीसी आरक्षण के आरक्षण लागू होने से पहले लागू करते हुए रोस्टर बना रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने 10 फीसदी आरक्षण के स्थान पर किसी-किसी कॉलेज ने 14,15 या 20 फीसदी तक आरक्षण दे दिया, जिससे एससी, एसटी, ओबीसी आरक्षण कम कर दिया गया और ईडब्ल्यूएस बढ़ाकर दिया गया। जीसीबी/एसजीके .Download Dainik Bhaskar Hindi App for Latest Hindi News.....Create VC of DU 5-member committee: Teachers Association. ..

डीयू के वीसी बनाएं 5 सदस्यीय कमेटी : टीचर्स एसोसिएशन

नई दिल्ली, 20 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली विश्वविद्यालय के अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के शिक्षक संगठनों ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति (वाइस चांसलर) को पत्र लिखकर मांग की है कि शिक्षकों की स्थायी नियुक्तियों से पूर्व रोस्टर, प्रो. काले कमेटी की रिपोर्ट व विज्ञापनों की सही से जांच कराने के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी बनाई जाएं।

कमेटी में वरिष्ठ प्रोफेसर, पूर्व विद्वत परिषद सदस्य के अलावा रोस्टर की जानकारी रखने वालों को इसमें रखा जाए। यह कमेटी अपनी रिपोर्ट 15 दिन के अंदर दे। सही रोस्टर के बाद ही कॉलेजों के विज्ञापन निकाले जाएं।

दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने बताया है कि हाल ही में आ रहे स्थायी शिक्षक नियुक्तियों के विज्ञापनों में कई तरह की विसंगतियां हैं। कॉलेजों द्वारा निकाले जा रहे विज्ञापनों में भारत सरकार की आरक्षण नीति व डीओपीटी के निर्देशों को सही से लागू नहीं किया गया है। साथ ही जो पद निकाले जा रहे हैं उनमें शॉर्टफाल, बैकलॉग और विश्वविद्यालय द्वारा बनाई गई प्रो. काले कमेटी की रिपोर्ट को स्वीकारते हुए करेक्ट रोस्टर नहीं बनाया गया है। इसमें एससी,एसटी, ओबीसी अभ्यर्थियों को जिस अनुपात में आरक्षण मिलना चाहिए था, वह नहीं दिया जा रहा है। तमाम कॉलेज सामाजिक न्याय और भारतीय संविधान की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं

एसोसिएशन ने बताया कि भगतसिंह कॉलेज (सांध्य) और स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज ने शिक्षकों के पदों के विज्ञापन निकाले हैं। शिक्षकों ने रोस्टर और आरक्षण को लेकर शिकायत की है, जिसमें भगत सिंह कॉलेज का रोस्टर फिर से बनाया जा रहा है।

दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन के प्रभारी व पूर्व विद्वत परिषद सदस्य प्रोफेसर हंसराज सुमन कहा, वाइस चांसलर को लिखे गए पत्र में उन्होंने विश्वविद्यालय में सामाजिक न्याय दिलाने की मांग करते हुए आरक्षण, रोस्टर और विज्ञापनों की जांच करने के लिए एक वरिष्ठ प्रोफेसर के नेतृत्व में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया जाए। कमेटी में पूर्व विद्वत परिषद सदस्य, रोस्टर की सही जानकारी रखने वाले सदस्यों को ही रखा जाए। कमेटी कॉलेजों में जाकर यह जांच करे कि हाल ही में शिक्षकों की स्थायी नियुक्तियों के लिए निकाले जा रहे विज्ञापन क्या सही है या नहीं।

दिल्ली यूनिवर्सिटी एससी, एसटी, ओबीसी टीचर्स फोरम के अध्यक्ष डॉ. के.पी.सिंह ने बताया है कि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्गो (ईडब्ल्यूएस आरक्षण) को 10 फीसदी आरक्षण फरवरी ,2019 में आया था, जिसे विश्वविद्यालय और कॉलेजों ने स्वीकारते हुए इसको रोस्टर में शामिल कर लिया। कॉलेजों ने ईडब्ल्यूएस रोस्टर को फरवरी 2019 से न बनाकर उसे एससी, एसटी, ओबीसी आरक्षण के आरक्षण लागू होने से पहले लागू करते हुए रोस्टर बना रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने 10 फीसदी आरक्षण के स्थान पर किसी-किसी कॉलेज ने 14,15 या 20 फीसदी तक आरक्षण दे दिया, जिससे एससी, एसटी, ओबीसी आरक्षण कम कर दिया गया और ईडब्ल्यूएस बढ़ाकर दिया गया।

जीसीबी/एसजीके



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